प्यार: कहीं मोहब्बत और अलविदा के बीच
Fiction

प्यार: कहीं मोहब्बत और अलविदा के बीच

by Anonymous · 2026-10-04

मोहब्बत और अलविदा के बीच उलझे प्रेम का सफर

5 chapters 10,867 words ~43 min read Hindi

Preview: बारिश में छूटा हुआ ख़त

A short excerpt from “बारिश में छूटा हुआ ख़त”. The full book contains 5 chapters and 10,867 words.

गली नंबर सत्ताईस की लोहे की पट्टिका आधी पानी में डूबी थी। मीरा ने अपनी साड़ी का पल्लू घुटनों से ऊपर समेटा और अगले कदम के लिए टूटी हुई ईंट टटोली। नीचे कीचड़ था, उसके भीतर नाली का बहता पानी, और पानी के ऊपर तैरती हुई लाल मिर्चों की खाली थैलियाँ।


“बहन जी, आगे मत जाइए,” पीछे से नाव वाले लड़के ने पुकारा। “उस मोड़ के बाद पानी कमर तक है।”


मीरा ने मुड़कर देखा। लड़का अपनी छोटी-सी लकड़ी की नाव को रस्सी से थामे खड़ा था। बारिश उसकी पलकों से टपक रही थी। पुरानी दिल्ली की तंग गली में दोनों ओर झुकी हुई हवेलियाँ थीं, जिनकी खिड़कियों से लोग बाहर झाँक रहे थे। किसी छज्जे से बाल्टी गिरने की आवाज़ आई और पानी में गोल-गोल लहरें फैल गईं।


“मुझे बस घर तक पहुँचना है,” मीरा ने कहा।


“घर तक तो नाव से पहुँच जाएँगी। अंदर कैसे जाएँगी?”


“अंदर जाना ही है।”


उसने बैग को कंधे पर कस लिया। उसमें घर की चाबियाँ थीं, कुछ पुराने काग़ज़ और वह सूची, जिसे वह पिछले तीन दिनों से बार-बार पढ़ रही थी। पुश्तैनी घर खाली करना था। माँ की संदूकची निकालनी थी। बाकी सब बेच देना था - लकड़ी की अलमारी, पीतल के बर्तन, दीवारों पर जमी धूल, और वे कमरे जिनमें उसकी आवाज़ वर्षों से वापस नहीं लौटी थी।


आरव का नाम उस सूची में नहीं था।


मीरा ने उसे वहाँ रहने भी नहीं दिया था।


नाव वाला लड़का बड़बड़ाता हुआ आगे आया। मीरा नाव में चढ़ी तो पानी से भीगी लकड़ी उसके पैरों के नीचे चरमराई। नाव गली के बीचोंबीच धीरे-धीरे सरकने लगी। दोनों ओर बंद दुकानों के शटर पानी में अपना उलटा चेहरा देख रहे थे। कहीं से भीगे कोयले की गंध आ रही थी, कहीं से मसालों और सीलन की। बारिश की मोटी धारें टीन की छतों पर पड़कर ऐसी आवाज़ कर रही थीं जैसे कोई लगातार दरवाज़ा पीट रहा हो।


“आप अकेली हैं?” लड़के ने पूछा।


“हाँ।”


“घर में कोई नहीं?”


“नहीं।”


“फिर भी अंदर जाएँगी?”


मीरा ने सामने देखा। गली के आख़िर में उसका घर था - तीन मंज़िलों की पुरानी इमारत, जिसकी नीली खिड़कियाँ अब धूसर हो चुकी थीं। सबसे ऊपर की जाली में कभी माँ तुलसी का गमला रखती थीं। अब वहाँ काई उग आई थी।


“माँ की चीज़ है,” उसने धीरे से कहा। “उसे छोड़ नहीं सकती।”


लड़के ने कुछ नहीं पूछा। नाव आगे बढ़ती रही।


घर का फाटक पानी के दबाव से आधा खुला था। मीरा नाव से उतरते ही घुटनों तक ठंडे पानी में धँस गई। चप्पल एक झटके में निकल गई। उसने हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ा, फिर दूसरी चप्पल भी उतारकर बैग में ठूँस ली।


फाटक के भीतर आँगन तक पहुँचने वाली सीढ़ियाँ दिखाई नहीं दे रही थीं। पानी में लकड़ी के टुकड़े, टूटे खिलौने और किसी पुराने कैलेंडर के पन्ने तैर रहे थे। दीवार पर चिपका हुआ देवी का चित्र पानी से फूलकर किनारों से उखड़ गया था।


मीरा ने चाबी निकाली। ताले में जंग भर चुकी थी। दो बार चाबी घूमी नहीं। तीसरी बार उसने दोनों हाथों से उसे दबाया। ताला खुला तो भीतर से बंद हवा का भारी झोंका उसके चेहरे से टकराया।


“जल्दी कीजिए!” नाव वाला बाहर से चिल्लाया। “पानी और चढ़ रहा है!”


मीरा ने पीछे मुड़कर देखा। गली में पानी अब उसके घुटनों से ऊपर था। उसने फाटक भीतर से खींचकर बंद किया और बरामदे की ओर बढ़ गई।


घर के भीतर अँधेरा था। बिजली कई घंटे पहले जा चुकी थी। मीरा ने मोबाइल की रोशनी जलाई। दीवारों पर पुराने चित्र टेढ़े लटक रहे थे। बैठक में माँ की आरामकुर्सी उलटी पड़ी थी, और उसके नीचे से पानी पतली धार बनाकर भीतर आ रहा था।


संदूकची ऊपर वाले कमरे में थी।


माँ ने मरने से दो महीने पहले उसका हाथ पकड़कर कहा था, “जब घर खाली करना, संदूकची अपने साथ ले जाना। उसमें मेरी ज़िंदगी है।”


मीरा ने तब हँसकर पूछा था, “इतनी बड़ी ज़िंदगी इस छोटी संदूकची में?”


माँ ने जवाब नहीं दिया था। बस उसकी उँगलियाँ कस गई थीं।


सीढ़ियों पर पानी बह रहा था। मीरा ने रेलिंग पकड़ी और एक-एक पायदान चढ़ने लगी। तीसरे पायदान पर पैर फिसला। उसका घुटना लोहे से टकराया। दर्द की तेज़ लहर उठी, मगर उसने आवाज़ नहीं की। ऊपर से कहीं काँच टूटने की आवाज़ आई। हवा के झोंके से दूसरी मंज़िल की खिड़की खुल गई थी।


“बस संदूकची,” उसने खुद से कहा। “बस उसे लेकर निकलना है।”


ऊपर माँ का कमरा वैसा ही था, जैसे किसी ने उसे छोड़ते समय दरवाज़ा बंद कर दिया हो। पलंग पर सफ़ेद चादर पीली पड़ चुकी थी। कोने में लकड़ी की संदूकची रखी थी, आधी पानी में डूबी हुई। उसके ऊपर माँ की नीली शॉल पड़ी थी।


मीरा घुटनों के बल बैठ गई। संदूकची भारी थी। उसने कुंडी उठाई, मगर लकड़ी फूल जाने से ढक्कन अटक गया। उसने पास पड़ी लोहे की छड़ उठाई और कुंडी के नीचे फँसा दी।


पहली चोट में कुछ नहीं हुआ।


दूसरी चोट में कुंडी टेढ़ी हुई।


तीसरी चोट के साथ ढक्कन खुल गया और भीतर जमा पानी उसके पैरों पर फैल गया।


कपड़ों की तहें, पीतल का छोटा दिया, माँ की चूड़ियाँ, कुछ तस्वीरें और कपड़े में लिपटा हुआ एक बंडल। मीरा ने बंडल उठाया। कपड़ा गल चुका था। उसके भीतर काग़ज़ थे - पीले, मुड़े हुए, किनारों से भीगे।


वह उन्हें एक ओर रखने लगी, तभी एक लिफ़ाफ़ा संदूकची के कोने से फिसलकर पानी में गिरा।


उस पर उसका नाम लिखा था।


मीरा।


लिखावट पहचानते ही उसकी उँगलियाँ ठिठक गईं। अक्षरों का झुकाव, ‘म’ की आख़िरी रेखा, नाम के नीचे खिंची छोटी-सी लकीर - आरव।


कमरे की खुली खिड़की से बारिश भीतर आ रही थी। पानी की बूँद लिफ़ाफ़े पर गिरी और स्याही का एक किनारा फैल गया।


मीरा ने उसे उठा लिया।


“नहीं,” उसके मुँह से निकला।


वह लिफ़ाफ़ा संदूकची में वापस रखने लगी, मगर उसके हाथ नहीं माने। उसने काँपती उँगली से किनारा खोला। काग़ज़ भीतर से चिपका हुआ था। उसने सावधानी से उसे खींचा। आधा पन्ना बाहर आया, बाकी नीचे से फट गया।


पहली पंक्ति पढ़ते ही कमरे की आवाज़ें धीमी पड़ गईं।


“मीरा, अगर यह ख़त तुम्हें मिला है, तो शायद मैं तुम्हें विदा कहे बिना जा चुका हूँ।”


उसने पन्ना दोनों हाथों से पकड़ा। बारिश की बूँदें उसके बालों से टपककर काग़ज़ पर गिर रही थीं।

...

What's inside: 5 chapters

  1. 1. बारिश में छूटा हुआ ख़त
  2. 2. विदा चुनने की कीमत
  3. 3. ख़त के पीछे की सच्चाई
  4. 4. स्टेशन पर आख़िरी पुकार
  5. 5. दूरी में उगा भरोसा

About this book

"प्यार: कहीं मोहब्बत और अलविदा के बीच" is a fiction book by Anonymous with 5 chapters and approximately 10,867 words. मोहब्बत और अलविदा के बीच उलझे प्रेम का सफर.

This book was created using Inkfluence AI, an AI-powered book generation platform that helps authors write, design, and publish complete books. It was made with the AI Novel Writer.

Frequently Asked Questions

What is "प्यार: कहीं मोहब्बत और अलविदा के बीच" about?

मोहब्बत और अलविदा के बीच उलझे प्रेम का सफर

How many chapters are in "प्यार: कहीं मोहब्बत और अलविदा के बीच"?

The book contains 5 chapters and approximately 10,867 words. Topics covered include बारिश में छूटा हुआ ख़त, विदा चुनने की कीमत, ख़त के पीछे की सच्चाई, स्टेशन पर आख़िरी पुकार, and more.

Who wrote "प्यार: कहीं मोहब्बत और अलविदा के बीच"?

This book was written by Anonymous and created using Inkfluence AI, an AI book generation platform that helps authors write, design, and publish books.

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