Ek Kadam Aur
Fiction

Ek Kadam Aur

by Dhanishtha Saini · 2026-10-12

A young man learns skills, faces rejection, and earns his first project

5 chapters 11,581 words ~46 min read Hindi 46 reads

Preview: ऑनलाइन कमाई का उलझा बाज़ार

A short excerpt from “ऑनलाइन कमाई का उलझा बाज़ार”. The full book contains 5 chapters and 11,581 words.

बाज़ार की मुख्य सड़क पर लगी डिजिटल घड़ी रात के आठ बजा रही थी, लेकिन आरव के छोटे शहर में दिन अभी खत्म नहीं हुआ था। मिठाई की दुकानों से छन-छनकर आती घंटियों, मोटरसाइकिलों के हॉर्न और सब्ज़ीवालों की पुकार के बीच वह मोबाइल स्क्रीन पर झुका चल रहा था। सड़क की धूल उसके जूतों पर जम रही थी, फिर भी उसकी नज़र स्क्रीन से हट नहीं रही थी।


“सिर्फ सात दिनों में घर बैठे लाखों कमाएँ!”


नीचे एक चमकता हुआ चेहरा मुस्करा रहा था। उसके पीछे नोटों की गड्डियाँ थीं और सामने बड़े अक्षरों में लिखा था कि मेहनत करने की ज़रूरत नहीं, बस सही तरीका जानना चाहिए।


आरव ने वीडियो रोक दिया।


“सच में?” उसने धीमे से कहा।


उसी पल पीछे से आती स्कूटी ने तेज़ हॉर्न बजाया। आरव किनारे हटते-हटते एक पान की दुकान के सामने जा रुका। दुकानदार ने उसे घूरकर देखा, जैसे वह रास्ते के बीचोंबीच खड़ा कोई सामान हो।


“भाई, मोबाइल बाद में देख लेना,” दुकानदार ने कहा, “पहले जान बचा लो।”


आरव ने झेंपकर सिर हिलाया और जेब में रखा मोबाइल निकालकर फिर देख लिया। वीडियो खत्म हो चुका था, मगर उसके भीतर सवाल शुरू हो गए थे। अगर सचमुच घर बैठे कमाई हो सकती थी, तो वह अब तक क्यों नहीं कर पाया था? उसके पास महँगा फोन नहीं था, कंप्यूटर नहीं था, और ऐसी कोई खास कला भी नहीं थी जिसे देखकर कोई उसे काम दे देता।


उसकी जेब में कुल दो सौ सैंतालीस रुपये थे। अगले हफ्ते मोबाइल का रिचार्ज भी करना था। घर पर माँ ने सुबह जाते समय बस इतना कहा था, “आरव, इस बार कुछ बचा लेना। महीने का हिसाब तंग चल रहा है।”


वह हिसाब उसके दिमाग में वैसे ही घूम रहा था जैसे सड़क पर उड़ती धूल।


आरव ने वीडियो फिर चलाया। आदमी बड़े भरोसे से बोल रहा था, “नौकरी छोड़िए, निवेश कीजिए, अपनी कमाई को अपने लिए काम करने दीजिए।”


आरव ने होंठ भींचे। नौकरी तो उसके पास थी ही नहीं। वह कभी किसी साइबर कैफ़े में घंटों बैठकर छोटे-मोटे काम कर लेता, कभी पड़ोस की दुकान का हिसाब लिख देता, और कभी पूरे दिन खाली घूमता रहता। निवेश करने के लिए पैसे चाहिए थे। उसके पास तो महीने के अंत तक टिकने लायक पैसे भी मुश्किल से रहते थे।


फिर अगला वीडियो खुल गया।


“शेयर बाज़ार में रोज़ कमाइए।”


तीसरे में कोई कह रहा था, “मशीन से लिखवाइए और हर दिन दस हज़ार कमाइए।”


चौथे में किसी ने अपना चमकदार कमरा दिखाते हुए कहा, “बस मेरा तरीका अपनाइए।”


आरव बाज़ार के बीच खड़ा था, लेकिन उसे लग रहा था कि वह किसी ऐसे कमरे में फँस गया है जिसकी हर दीवार पर अलग दिशा का तीर बना है। कोई उसे ऊपर भेज रहा था, कोई दाएँ, कोई पीछे। वह जितना देखता, उतना ही उलझता जाता।


सामने कपड़ों की दुकान के बाहर तेज़ रोशनी चमक रही थी। काँच के भीतर रखी कमीज़ों पर बड़े-बड़े दाम लिखे थे। आरव ने अपनी फीकी नीली शर्ट की बाँह देखी। कलाई के पास कपड़ा घिसकर पतला हो गया था।


“बस एक भरोसेमंद रास्ता मिल जाए,” उसने मन में कहा, “फिर मैं संभाल लूँगा।”


वह चाय की गुमटी पर जा बैठा। गिलास उसके हाथ में गर्म था और किनारे पर चाय की पतली परत जम रही थी। पास बैठे दो लड़के किसी ऑनलाइन पाठ्यक्रम की बात कर रहे थे।


“भाई, मैंने तो पैसे डाल दिए,” उनमें से एक ने कहा, “कह रहे हैं तीन महीने में सब वापस आ जाएगा।”


“किस चीज़ में?” दूसरे ने पूछा।


“कुछ डिजिटल वाला काम है। ठीक से समझ नहीं आया, पर सब कर रहे हैं।”


आरव ने अनायास उनकी ओर देखा।


“तुम्हें समझ आया?” पहले लड़के ने उसे देख लिया।


आरव ने हल्की मुस्कान दी। “नहीं।”


“तो फिर सीख लो। आजकल जो ऑनलाइन नहीं कमा रहा, वह पीछे रह गया।”


लड़का हँसते हुए अपनी मोटरसाइकिल की ओर चला गया। उसका वाक्य आरव के कानों में देर तक अटका रहा - जो ऑनलाइन नहीं कमा रहा, वह पीछे रह गया।


घर लौटने से पहले आरव ने बाज़ार की आखिरी गली में बने छोटे साइबर कैफ़े का रुख किया। बाहर टेढ़े बोर्ड पर लिखा था - “प्रिंट, स्कैन, ऑनलाइन फ़ॉर्म, फोटो।” भीतर तीन पुराने कंप्यूटरों की नीली रोशनी दीवारों पर काँप रही थी। पंखा आवाज़ करता हुआ घूम रहा था, जैसे हर चक्कर में अपनी शिकायत दर्ज कराता हो।


कैफ़े वाले ने उसे देखते ही पूछा, “क्या काम है?”


“भैया, इंटरनेट चलाना है। आधा घंटा।”


“पैसे पहले।”


आरव ने जेब से सिक्के और मुड़े हुए नोट निकालकर मेज़ पर रखे। लड़के ने गिनकर कहा, “पैंतीस मिनट।”


आरव ने सिर हिलाया और सबसे कोने वाली कुर्सी पर बैठ गया। उसने खोज में लिखना शुरू किया - घर बैठे कमाई कैसे करें।


स्क्रीन पर इतने परिणाम आए कि उसकी आँखें चकराने लगीं। किसी ने कहा वीडियो बनाओ, किसी ने कहा विदेशी सामान बेचो, किसी ने कहा विज्ञापन चलाओ। कुछ लोग अपने महँगे कमरों और नई गाड़ियों के साथ खड़े थे। कुछ के शीर्षक इतने चमकीले थे कि आरव को लगा, अगर वह अभी क्लिक नहीं करेगा तो जीवन भर गरीब ही रह जाएगा।


उसने एक वीडियो खोला।


“आपको कोई कौशल सीखने की ज़रूरत नहीं,” आवाज़ आई, “हमारा तैयार तरीका अपनाइए और कमाई शुरू कीजिए।”


आरव ने वीडियो रोककर नीचे लिखी टिप्पणियाँ पढ़ीं। किसी ने लिखा था कि पैसे देने के बाद जवाब नहीं मिला। किसी ने कहा कि उसका खाता बंद हो गया। किसी ने लिखा, “भाई, असली तरीका बताओ।”


आरव की उँगली स्क्रीन पर ठहर गई।


वह दूसरा वीडियो खोलने ही वाला था कि कैफ़े वाला उसके पास आ गया। “हो गया समय।”


“दो मिनट और, भैया।”


“दो मिनट सब कहते हैं। बिजली का बिल भी दो मिनट से नहीं भरता।”


आरव ने घबराकर आखिरी बार स्क्रीन देखी। उसी समय एक विज्ञापन खुला - “आज ही अमीर बनें।”


उसने उसे बंद कर दिया।


बाहर निकलते ही रात की ठंडी हवा चेहरे से टकराई। बाज़ार कुछ धीमा पड़ चुका था, मगर पूरी तरह शांत नहीं हुआ था। बंद होती दुकानों के शटर खड़खड़ा रहे थे। कहीं दूर मंदिर की घंटी बज रही थी। आरव सड़क पर चलता रहा और हर कुछ कदम बाद जेब टटोल लेता। पैंतीस रुपये कम हो चुके थे। यह बहुत बड़ी रकम नहीं थी, पर उसके लिए बेवजह खर्च भी नहीं था।

...

What's inside: 5 chapters

  1. 1. ऑनलाइन कमाई का उलझा बाज़ार
  2. 2. रोज़ का एक घंटा
  3. 3. पहले संदेश की ख़ामोशी
  4. 4. नमूनों से पहला भुगतान
  5. 5. डायरी में अगला कदम

About this book

"Ek Kadam Aur" is a fiction book by Dhanishtha Saini with 5 chapters and approximately 11,581 words. A young man learns skills, faces rejection, and earns his first project.

This book was created using Inkfluence AI, an AI-powered book generation platform that helps authors write, design, and publish complete books. It was made with the AI Novel Writer.

Frequently Asked Questions

What is "Ek Kadam Aur" about?

A young man learns skills, faces rejection, and earns his first project

How many chapters are in "Ek Kadam Aur"?

The book contains 5 chapters and approximately 11,581 words. Topics covered include ऑनलाइन कमाई का उलझा बाज़ार, रोज़ का एक घंटा, पहले संदेश की ख़ामोशी, नमूनों से पहला भुगतान, and more.

Who wrote "Ek Kadam Aur"?

This book was written by Dhanishtha Saini and created using Inkfluence AI, an AI book generation platform that helps authors write, design, and publish books.

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