Preview: बिज़नेस पिच, पहली टक्कर
A short excerpt from “बिज़नेस पिच, पहली टक्कर”. The full book contains 5 chapters and 11,887 words.
अनन्या ने प्रस्तुति की आख़िरी पंक्ति तीसरी बार बदलकर फिर मिटा दी।
ग्रीनरूम की सफ़ेद रोशनी में उसका चेहरा लैपटॉप की नीली चमक से और कठोर दिख रहा था। बाहर मुंबई के स्टार्टअप ऑडिटोरियम में कुर्सियाँ खिसकने की आवाज़ें, माइक्रोफ़ोन की खरखराहट और कॉफ़ी मशीन की कड़वी गंध एक-दूसरे में घुल रहे थे। पाँच मिनट बाद उसे मंच पर जाना था। उसे निवेश चाहिए था - और उससे भी ज़्यादा, उसे यह साबित करना था कि उसका नया प्रोजेक्ट केवल एक सुंदर विचार नहीं, बढ़ सकने वाला कारोबार है।
दरवाज़े के पास कैनवास टिकाए वह लड़का चुपचाप खड़ा था।
उसकी उँगलियों पर नीला और गेरुआ रंग लगा था। बालों में बारिश की नमी थी, जैसे वह सीधे किसी सड़क किनारे की चित्रशाला से यहाँ आया हो। उसने अनन्या की ओर देखा, फिर स्क्रीन पर झिलमिलाते शब्दों की ओर।
“तुमने फिर से आख़िरी हिस्सा काट दिया,” उसने कहा।
अनन्या ने बिना सिर उठाए उत्तर दिया, “क्योंकि निवेशक भावनाएँ नहीं खरीदते।”
“वे भविष्य खरीदते हैं। और भविष्य बिना कहानी के अक्सर सिर्फ़ आँकड़ा लगता है।”
“मुझे कहानी नहीं बेचनी। मुझे मंच पर टिकाऊ मॉडल बेचना है।”
वह मुस्कराया नहीं। बस कैनवास की लकड़ी पर उँगली थपथपाता रहा। उस छोटी-सी आवाज़ ने अनन्या को चिढ़ा दिया - टक, टक, टक - जैसे कोई उसके आत्मविश्वास में महीन दरार खोज रहा हो।
“तुम्हें पाँच मिनट में मेरे मॉडल को कविता नहीं बनाना है,” उसने कहा। “बस इतना करो कि प्रस्तुति के दौरान कोई अनावश्यक प्रयोग मत करना।”
“और अगर तुम्हारा मॉडल लोगों को याद ही न रहे?”
अब उसने सिर उठाया। उसकी आँखों में वह ठहरी हुई चमक थी जो अनन्या को असुविधाजनक लगती थी - क्योंकि वह उसके शब्दों के पीछे छिपी थकान तक पहुँच जाती थी।
“तुम्हारा नाम?” उसने पूछा, जैसे पहली बार सचमुच पूछ रही हो।
“कबीर।”
“कबीर, मैं इस शहर में याद रहने के लिए नहीं आई। मैं जीतने आई हूँ।”
“कभी-कभी दोनों के बीच बस एक सही वाक्य का फ़र्क होता है।”
अनन्या ने लैपटॉप बंद कर दिया। क्लिक की आवाज़ कुछ ज़्यादा तेज़ सुनाई दी।
कबीर ने उसकी ओर एक पतली-सी नोटबुक बढ़ाई। उसके पन्नों पर हाथ से बने चिह्न, रंगों की रेखाएँ और छोटे-छोटे वाक्य थे। ऊपर लिखा था - “हर कारोबार पहले किसी की अधूरी ज़रूरत होता है।”
अनन्या ने पन्ना पलटा। “यह क्या है?”
“तुम्हारे प्रोजेक्ट का आरंभ।”
“यह मेरी स्वीकृत प्रस्तुति का हिस्सा नहीं है।”
“तुम्हारी स्वीकृत प्रस्तुति में लोग कहाँ हैं?”
“लोग आँकड़ों में हैं।”
“नहीं। आँकड़ों में उनका व्यवहार है। वे खुद नहीं।”
बाहर उद्घोषक की आवाज़ गूँजी। “अगली प्रस्तुति के लिए कृपया तैयार रहें।”
अनन्या ने घड़ी देखी। उसकी हथेली ठंडी थी, जबकि ग्रीनरूम दमघोंटू गर्म। उसने नोटबुक बंद कर कबीर की छाती पर रख दी।
“मुझे मंच पर किसी ऐसे आदमी की ज़रूरत नहीं जो मेरी तैयारी को अपने कैनवास की तरह इस्तेमाल करे।”
कबीर ने नोटबुक वापस नहीं ली। “और मुझे किसी ऐसे कारोबार का हिस्सा नहीं बनना जो लोगों की आवाज़ को सजावटी आँकड़ों में बदल दे।”
दोनों के बीच कुछ क्षणों तक केवल एयर-कंडीशनर की घरघराहट रही।
अनन्या चाहती थी कि वह चला जाए। उसी क्षण वह यह भी चाहती थी कि वह वहीं खड़ा रहे।
यह विरोधाभास उसे और अधिक क्रोधित करता था।
वह दरवाज़े की ओर बढ़ी। कबीर ने रास्ता नहीं रोका, बस धीमे स्वर में कहा, “तुम्हारी तीसरी स्लाइड में जो लाल रेखा है, उसे हटाना मत।”
अनन्या ठिठकी। “क्यों?”
“क्योंकि वह बढ़त नहीं दिखाती। वह रुकावट दिखाती है। लोग रुकावट पर भरोसा करते हैं, पूर्णता पर नहीं।”
“तुम्हें कारोबार की समझ नहीं है।”
“शायद। लेकिन लोगों की आँखें पढ़ना आता है।”
वह उत्तर दिए बिना बाहर निकल गई।
ऑडिटोरियम का मंच नीली रोशनी में डूबा था। सामने निवेशकों की पहली पंक्ति में चमकते लैपटॉप, नोटपैड और निर्विकार चेहरे बैठे थे। पीछे स्क्रीन पर अनन्या की कंपनी का चिन्ह उभरा - साफ़, तीखा, नियंत्रित। उसे यही चाहिए था: नियंत्रण।
उसने बोलना शुरू किया।
पहली स्लाइड। समस्या।
दूसरी। बाज़ार।
तीसरी पर लाल रेखा सचमुच चमक रही थी - ग्राहकों की अधूरी यात्राएँ, बीच में छूटे हुए निर्णय, और उन निर्णयों से पैदा होने वाला नुकसान। अनन्या ने उसे हटाया नहीं था। शायद इसलिए कि कबीर की आवाज़ अब भी उसके कान में थी। शायद इसलिए कि उसे खुद भी मालूम था - हर तेज़ी के भीतर कोई अटकाव छिपा होता है।
प्रस्तुति आगे बढ़ी। उसका स्वर स्थिर था, हाथों की गति नपी हुई। निवेशकों में से एक ने सिर हिलाया। दूसरे ने नोट लिखा। तीसरे ने अपनी कुर्सी पर आगे झुककर स्क्रीन देखी।
अनन्या को लगा, वह जीत रही है।
फिर पाँचवीं स्लाइड आई।
उस पर एक चित्र था - धुँधले शहर में चलते लोग, उनके बीच चमकती हुई एक पतली पीली रेखा। चित्र के नीचे लिखा था: “व्यवसाय वहाँ शुरू होता है जहाँ किसी की कहानी सुनी जाती है।”
अनन्या ने उसे स्क्रीन पर देखा और उसके भीतर कुछ कस गया।
यह उसकी प्रस्तुति में नहीं था।
कबीर मंच के बाएँ किनारे पर खड़ा था। हाथ में दूरस्थ नियंत्रक था। उसने उसकी ओर देखा, जैसे पूछ रहा हो - अब?
अनन्या ने माइक्रोफ़ोन से हटकर धीमे कहा, “इसे हटाओ।”
कबीर ने दर्शकों की ओर देखा। “यह इस प्रोजेक्ट का केंद्रीय विचार है।”
“यह स्वीकृत सामग्री नहीं है।”
“क्योंकि तुमने इसे स्वीकृत नहीं किया।”
“कबीर।”
उसने पहली बार उसका नाम ऐसे लिया जिसमें चेतावनी थी। कबीर ने नियंत्रक नीचे कर दिया, पर चित्र स्क्रीन पर बना रहा।
सामने बैठे निवेशक अब दोनों को देख रहे थे। कमरे में फुसफुसाहट फैल गई।
अनन्या ने मुस्कराने की कोशिश की। “तकनीकी गड़बड़ी है। हम अगले - ”
“तकनीकी गड़बड़ी नहीं,” कबीर ने कहा। “रचनात्मक अधिकार का सवाल है।”
उसका स्वर ऊँचा नहीं था, पर मंच पर हर शब्द साफ़ उतर रहा था।
अनन्या का चेहरा गर्म हो गया। “यह मेरी प्रस्तुति है।”
“और वह चित्र मेरा है।”
“तुमने इसे मेरी अनुमति के बिना लगाया।”
...
What's inside: 5 chapters
- 1. बिज़नेस पिच, पहली टक्कर
- 2. लिखी हुई सेल्स, अनकही चाहत
- 3. स्केचबुक की गुमशुदा पंक्तियाँ
- 4. क्लाइंट की शर्त, रिश्ता टूटने का डर
- 5. साथ में पेंटेड वर्ड्स, दिल की जीत
About this book
"Queen Of Business, Painter Of Words" is a romance book by Abhishek with 5 chapters and approximately 11,887 words. A business-minded woman and an artist writer partner.
This book was created using Inkfluence AI, an AI-powered book generation platform that helps authors write, design, and publish complete books. It was made with the AI Romance Novel Writer.
Frequently Asked Questions
What is "Queen Of Business, Painter Of Words" about?
A business-minded woman and an artist writer partner
How many chapters are in "Queen Of Business, Painter Of Words"?
The book contains 5 chapters and approximately 11,887 words. Topics covered include बिज़नेस पिच, पहली टक्कर, लिखी हुई सेल्स, अनकही चाहत, स्केचबुक की गुमशुदा पंक्तियाँ, क्लाइंट की शर्त, रिश्ता टूटने का डर, and more.
Who wrote "Queen Of Business, Painter Of Words"?
This book was written by Abhishek and created using Inkfluence AI, an AI book generation platform that helps authors write, design, and publish books.
How can I create a similar romance book?
You can create your own romance book using Inkfluence AI. Describe your idea, choose your style, and the AI writes the full book for you. It's free to start.
Write your own romance book with AI
Describe your idea and Inkfluence writes the whole thing. Free to start.
Start writingCreated with Inkfluence AI