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गुरु अर्जन देव की आग
Fiction

गुरु अर्जन देव की आग

by Adyant · Published 2026-08-08

Created with Inkfluence AI

5 chapters 10,238 words ~41 min read Hindi

गुरु अर्जन देव के सत्य और नाम-जप की कथा

Table of Contents

  1. 1. गुरु की गिरफ्तारी की अफवाह
  2. 2. रावी तक पहुँचने की कसम
  3. 3. तवे की गर्मी का सच
  4. 4. रावी ने गुरु को ले लिया
  5. 5. नाम-जप की नई आग

Preview: गुरु की गिरफ्तारी की अफवाह

A short excerpt from “गुरु की गिरफ्तारी की अफवाह”. The full book contains 5 chapters and 10,238 words.

लाहौर की बाजार-गली में पीतल के कटोरों की खनक अचानक थम गई। सूरज सिर के ठीक ऊपर था और दुकानों के आगे टँगे फटे कपड़े भी गर्म हवा में जैसे जलते हुए हिल रहे थे। धूल ने पत्थर की सड़क पर पीली परत जमा दी थी। रशीद खान अपनी हथेली से आँखें ढँककर मसालों की दुकान से बाहर निकला ही था कि सामने से भागता हुआ एक लड़का आया।


“सुना तुमने?” लड़के ने हाँफते हुए कहा। “गुरु अर्जन देव को पकड़ लिया गया है!”


रशीद के हाथ से कपड़े की छोटी गठरी छूटते-छूटते बची। उसमें उसकी माँ के लिए दवा थी। वह लड़के की ओर झुका।


“किसने कहा?”


“किले की तरफ से लोग आए हैं। कहते हैं, बादशाह नाराज है।”


“देखा किसने?”


लड़के ने इधर-उधर देखा। पास की दुकान में बैठे व्यापारी ने तुरंत सिर झुका लिया। एक कुम्हार ने अपने घड़े के मुँह पर कपड़ा डाल दिया। सड़क के उस पार रोटी बेचने वाली विधवा ने तवे से उठती भाप में अपना चेहरा छिपा लिया।


“किसी ने नहीं देखा,” लड़के ने धीमे कहा, “पर बात झूठ नहीं लगती।”


इतना कहकर वह धूल के बादल में गायब हो गया।


रशीद कुछ पल वहीं खड़ा रहा। उसके पैरों के नीचे पत्थर तप रहे थे। दवा की गठरी उसकी मुट्ठी में पसीने से भीग गई। उसे घर पहुँचना था। माँ सुबह से खाँस रही थी और वैद्य ने कहा था कि दवा देर से पहुँची तो रात भारी पड़ सकती है। मगर गुरु अर्जन देव का नाम सुनते ही उसके भीतर कोई पुराना दरवाजा खुल गया।


कुछ सप्ताह पहले गुरु की वाणी उसने पहली बार सुनी थी। भीड़ बड़ी नहीं थी - मजदूर, किसान, दो-तीन व्यापारी और कुछ ऐसे लोग जिनके नाम कोई नहीं पूछता था। गुरु ने कहा था, “सच का सहारा बाहर नहीं, भीतर खोजो। नाम जपो, तो डर अपनी जगह छोड़ देता है।”


रशीद ने तब कुछ नहीं कहा था। वह केवल दूर खड़ा सुनता रहा था। गुरु न राजा थे, न सिपाही। उनके पास न तलवार थी, न सेना। फिर भी उनके सामने बैठे लोगों के चेहरे ऐसे शांत हो जाते थे, जैसे किसी ने भीतर जलता चिराग ढँक दिया हो।


“रशीद!”


एक भारी आवाज ने उसे वर्तमान में लौटा दिया। मसाले वाला बूढ़ा दुकान की ओट से झाँक रहा था।


“वहाँ मत जाना,” उसने कहा। “किले की राह आज बंद है।”


“गुरु को सचमुच पकड़ लिया गया है?”


बूढ़े ने होंठ भींच लिए। “नाम मत लो।”


“क्यों?”


“दीवारों के भी कान होते हैं।”


पास खड़े एक मजदूर ने धीरे से कहा, “सुबह दो सिपाही आए थे। बोले, जो गुरु के साथ दिखेगा, उसे भी पूछताछ के लिए ले जाएँगे।”


“तो क्या हम चुप रहें?” रशीद के मुँह से निकल गया।


मजदूर ने उसकी ओर देखा। उसकी आँखों में धूल से अधिक भय था। “चुप रहना ही बचना है।”


यह बात गली में पत्थर की तरह गिरकर फैल गई। किसी ने उसे उठाया नहीं, पर सबकी निगाहें उससे बचने लगीं।


रशीद ने दवा की गठरी कमर में खोंसी और किले की ओर देखने लगा। बाजार की आखिरी मोड़ के पार ऊँची दीवारों का एक कोना दिखाई देता था। धूप में वह दीवार सफेद नहीं, राख जैसी लग रही थी। उसके ऊपर पहरा देने वालों की परछाइयाँ कभी-कभी सरकतीं और फिर पत्थर में मिल जातीं।


उसे सच्चाई जाननी थी। अफवाह के सहारे घर लौट जाना उसके लिए अब संभव नहीं था। यदि गुरु सचमुच पकड़े गए थे, तो उन्हें अकेला छोड़ देना उसके भीतर की उस आवाज के साथ विश्वासघात होता, जिसे उसने पहली बार गुरु की वाणी में सुना था।


वह किले की दिशा में चल पड़ा।


गली ने उसे तुरंत रोक लिया। आगे बैलगाड़ी उलटी पड़ी थी और उसके पहिए के नीचे एक बूढ़ा गधा छटपटा रहा था। लोग किनारे खड़े तमाशा देख रहे थे, पर कोई हाथ लगाने को तैयार न था। रशीद ने अपनी पगड़ी उतारी, पहिए के नीचे खोंसी और कंधा लगाकर उसे उठाने की कोशिश की।


“पागल हो गए हो?” किसी ने फुसफुसाकर कहा। “सिपाही आ सकते हैं।”


“पहले इसे निकालो,” रशीद ने दाँत भींचते हुए कहा।


एक युवक आगे आया। फिर दूसरा। तीनों ने जोर लगाया। पहिया हिला, गधा झटके से बाहर निकला और धूल उड़ाता हुआ भाग गया। उसी क्षण दूर से घोड़ों की टाप सुनाई दी।


सबके हाथ रुक गए।


गली के दोनों ओर लोग अपनी-अपनी दुकानों में घुसने लगे। दरवाजे बंद हुए। लकड़ी की पट्टियाँ गिरने की आवाजें एक के बाद एक सुनाई दीं। रशीद ने भी दीवार से चिपककर साँस रोक ली। चार सिपाही घोड़ों पर सवार होकर मोड़ से निकले। उनके भालों की नोक धूप में चमक रही थी।


“किसी ने गुरु का नाम लिया?” आगे वाले सिपाही ने पूछा।


किसी ने उत्तर नहीं दिया।


सिपाही ने घोड़ा रोककर भीड़ पर नजर दौड़ाई। रशीद के कानों में अपनी ही साँस की आवाज गूँज रही थी। उसकी उँगलियाँ दवा की गठरी पर कस गईं। सिपाही की आँखें उसके चेहरे पर ठहर गईं।


“तुम,” उसने कहा, “किधर जा रहे हो?”


रशीद ने किले की ओर देखने की भूल कर दी। सिपाही ने वह दिशा पकड़ ली।


“घर,” रशीद ने कहा।


“घर किस तरफ है?”


रशीद ने पीछे की सँकरी गली की ओर इशारा किया। “उधर।”


सिपाही कुछ पल उसे देखता रहा। फिर घोड़े को एड़ी लगाई। “आज कोई भी किले की राह पर न जाए।”


घोड़ों की टाप दूर होती गई, पर गली का डर वहीं पड़ा रहा।


मसाले वाला बूढ़ा बाहर आया। उसने रशीद की बाँह पकड़ ली।


“अब लौट जाओ।”


“तुमने कहा था, किले की राह बंद है। मुझे दूसरी राह बताओ।”


बूढ़े ने हाथ झटक दिया। “दूसरी राह नहीं होती। जो किले तक जाता है, वह पहरे से होकर जाता है।”


“और जो गुरु तक पहुँचना चाहे?”


बूढ़े की आँखें काँप उठीं। उसने पहली बार गुरु का नाम अपने होंठों पर आने दिया, पर आवाज नहीं बनी।


तभी रोटी बेचने वाली विधवा ने धीमे से कहा, “पश्चिमी नाले के पास से एक पुरानी पगडंडी जाती है।”


सभी की निगाहें उसकी ओर उठीं।


“तुमने देखा है?” रशीद ने पूछा।


“रोटी लेकर सैनिकों के शिविर तक गई हूँ। रास्ता दीवार के पीछे से घूमता है। पर आज वहाँ पहरा होगा।”


“फिर भी रास्ता है।”


विधवा ने तवे से रोटी उतारी। उसकी उँगलियाँ जल गईं, पर उसने आवाज नहीं की। “रास्ता होना और वहाँ पहुँच पाना अलग बातें हैं।”


रशीद ने दवा की गठरी निकाली और उसकी ओर बढ़ा दी। “इसे मेरी माँ तक पहुँचा देना।”


“तुम्हारी माँ?”

...

About this book

"गुरु अर्जन देव की आग" is a fiction book by Adyant with 5 chapters and approximately 10,238 words. गुरु अर्जन देव के सत्य और नाम-जप की कथा.

This book was created using Inkfluence AI, an AI-powered book generation platform that helps authors write, design, and publish complete books. It was made with the AI Novel Writer.

Frequently Asked Questions

What is "गुरु अर्जन देव की आग" about?

गुरु अर्जन देव के सत्य और नाम-जप की कथा

How many chapters are in "गुरु अर्जन देव की आग"?

The book contains 5 chapters and approximately 10,238 words. Topics covered include गुरु की गिरफ्तारी की अफवाह, रावी तक पहुँचने की कसम, तवे की गर्मी का सच, रावी ने गुरु को ले लिया, and more.

Who wrote "गुरु अर्जन देव की आग"?

This book was written by Adyant and created using Inkfluence AI, an AI book generation platform that helps authors write, design, and publish books.

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