Hindi Sad Poetry Collection
Created with Inkfluence AI
Hindi sad poetry collection with author background
Table of Contents
- 1. सिरहाने की खाली कुर्सी
- 2. आँसू का नमक गणित
- 3. यादों की धूल भरी डिब्बी
- 4. कागज़ी रस्में और श्वास
- 5. पहली रोशनी का अलविदा
Preview: सिरहाने की खाली कुर्सी
A short excerpt from “सिरहाने की खाली कुर्सी”. The full book contains 5 chapters and 2,779 words.
तीसरी कुर्सी
स्टील की तीसरी कुर्सी पर
आज भी धूप का एक चौकोर टुकड़ा है,
दो प्यालियाँ भाप छोड़ते-छोड़ते
ठंडी हो चुकी हैं,
तीसरा प्याला उलटा रखा है - जैसे लौटने की जल्दी में
किसी ने उसे छुआ ही नहीं।
घड़ी की सुई
बारह पर अटककर भी चलती है,
टिक - फिर एक लंबी चुप्पी,
टिक - और कमरे में बची आवाज़
चाय की कटोरी से टकराती है।
कुर्सी के नीचे
एक मुड़ा हुआ रूमाल पड़ा है,
उसमें अब भी
विदा का नमक सूखा हुआ है।
---
ठंडी कटोरी
पीतल की कटोरी में
चाय की पतली परत जम गई है,
किनारे पर अदरक का
एक छोटा-सा टुकड़ा
कड़वाहट बचाए बैठा है।
दो घूँटों के बीच
तुम्हारी बात रुक गई थी,
तीसरे घूँट तक पहुँचते-पहुँचते
दरवाज़ा बंद हो गया।
मैंने कटोरी उठाई,
हथेली को गर्मी नहीं मिली,
सिर्फ़ उँगलियों पर
तुम्हारे होंठों का निशान
हल्का-सा काँपा।
घड़ी ने तीन बार बजकर
रात का हिसाब दिया,
पर मेज़ पर पड़ी चम्मच
अब भी तुम्हारी ओर मुड़ी थी।
सुबह तक
चाय सूख गई,
कुर्सी खाली रही,
और एक कप
अपने भीतर
पूरा घर डुबोता रहा।
---
टिक का अंतराल
दीवार की घड़ी में
सेकंड वाली सुई
हर बार उसी जगह पहुँचती है,
जहाँ तुमने कहा था - “बस अभी आता हूँ।”
टिक
कमरे का कोना नापता है,
टिक
तीसरी कुर्सी की पीठ छूता है,
टिक
चाय की कटोरी के तल में
जमी परछाईं हिलाता है।
बारह टिकों के बाद
मैंने दरवाज़े की ओर देखा,
चौबीस के बाद
तुम्हारा नाम भीतर ही भीतर पुकारा।
घड़ी चलती रही,
मेरी प्रतीक्षा
एक ही मिनट में
बूढ़ी होती रही।
अब हर टिक
समय नहीं बताता,
वह खाली जगह का
नया आकार बनाता है।
---
खाली स्थान
मेज़ को दीवार से
छह उँगली दूर खिसकाया गया,
फिर भी तीसरी कुर्सी
किसी अदृश्य देह से लगी रही।
उसकी सीट पर
धूल की एक साफ़ रेखा थी,
जैसे कोई रोज़ बैठता हो
और उठते समय
अपना भार छोड़ जाता हो।
चाय की कटोरी
मेज़ के दाहिने कोने में थी,
उसमें डूबी इलायची
अपनी सुगंध खो चुकी थी।
घड़ी की टिक
कपड़े में फँसी सुई जैसी
धीरे-धीरे चुभती रही।
मैंने खाली-स्थान मैपिंग मॉडल की तरह
कमरे को चार हिस्सों में बाँटा - कुर्सी, कटोरी, घड़ी, दरवाज़ा - हर जगह तुम्हारी अनुपस्थिति मिली।
नापने पर
सबसे बड़ी दूरी
तीसरी कुर्सी से
मेरी हथेली तक निकली।
---
लौटने की कुर्सी
कुर्सी को फेंका नहीं,
उसकी एक टाँग
अब भी समतल ज़मीन खोजती थी।
मैंने नीचे
मुड़ा हुआ काग़ज़ रखा,
जिस पर तारीख थी - सात जुलाई दो हज़ार छह,
और किनारे पर
चाय का भूरा धब्बा।
कटोरी धोते हुए
तुम्हारी हँसी की जगह
नल का पानी गिरा,
घड़ी ने छह बजकर
सत्रह मिनट बताए।
सिकर की उस लंबी शाम में
रेत खिड़की तक आई,
पर कुर्सी के पास
धूल नहीं जमी।
शायद प्रतीक्षा
फर्नीचर से भी
ज़्यादा देर टिकती है,
शायद कोई लौटता नहीं,
फिर भी जगह
दरवाज़े की ओर खुली रहती है।
मैंने तीसरी कुर्सी
मेज़ से थोड़ा पीछे कर दी - इतनी कि
कोई आए तो
बिना पूछे बैठ सके।
और घड़ी की टिक में
एक बहुत धीमी
आहट बची रही।
About this book
"Hindi Sad Poetry Collection" is a poetry collection book by kamal luna with 5 chapters and approximately 2,779 words. Hindi sad poetry collection with author background.
This book was created using Inkfluence AI, an AI-powered book generation platform that helps authors write, design, and publish complete books.
Frequently Asked Questions
What is "Hindi Sad Poetry Collection" about?
Hindi sad poetry collection with author background
How many chapters are in "Hindi Sad Poetry Collection"?
The book contains 5 chapters and approximately 2,779 words. Topics covered include सिरहाने की खाली कुर्सी, आँसू का नमक गणित, यादों की धूल भरी डिब्बी, कागज़ी रस्में और श्वास, and more.
Who wrote "Hindi Sad Poetry Collection"?
This book was written by kamal luna and created using Inkfluence AI, an AI book generation platform that helps authors write, design, and publish books.
Write your own poetry collection book with AI
Describe your idea and Inkfluence writes the whole thing. Free to start.
Start writingCreated with Inkfluence AI