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Kya Hai Adhura Ishq
Romance

Kya Hai Adhura Ishq

by Anonymous · Published 2026-04-17

Created with Inkfluence AI

5 chapters 10,768 words ~43 min read Hindi

Adhure ishq aur uske ehsaas par romance

Table of Contents

  1. 1. पहली मुलाकात, अधूरी खामोशी
  2. 2. मुस्कान के पीछे छुपी हिचक
  3. 3. उसके बिना अधूरा दिन
  4. 4. गलतफहमी और रिश्ते की परीक्षा
  5. 5. अधूरा इश्क, पूरा वादा

First chapter preview

A short excerpt from chapter 1. The full book contains 5 chapters and 10,768 words.

बारिश की पतली धार खिड़की के कांच पर रुक-रुककर फिसल रही थी, और उसी लय में शहर की आवाज़ भी अंदर आती जा रही थी-ट्रैफिक की सीटी, कहीं दूर किसी दुकान का गूंजता संगीत, फिर अचानक सन्नाटा। नीलम ने चाय की प्याली हाथ में थामी तो कप की गर्माहट हथेली में उतरते-उतरते ठिठक गई। सामने दीवार पर टंगी घड़ी की सुई हर सेकंड हिलती, जैसे उसे भी याद दिला रही हो कि आज वही दिन है-जिसका उसे बेसब्री से इंतज़ार भी था और डर भी।


वो पहली बार उसे आज देखेगी… या शायद पहली बार नहीं, बस पहली बार ठीक-ठीक समझेगी कि उसकी नज़रें उसे ढूँढती क्यों रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों से कॉलेज की लाइब्रेरी की सीढ़ियों पर उसकी मौजूदगी अचानक-आकस्मिक नहीं लगती थी। नीलम जब भी किसी किताब की रीढ़ पर उँगली टिकाती, सामने वाले रैक के पीछे से वही हल्का-सा खिंचाव दिखता-एक चेहरा, जो पल भर को दिखकर फिर गायब हो जाता। आज वही दिखना था, वो भी इस बारिश में, इस पुराने कैफे की छत के नीचे, जहाँ हवा में चाय की कड़वाहट और भीगी मिट्टी की खुशबू साथ चलती है।


दरवाज़े की घंटी बजी। नीलम ने नज़रें उठाईं तो बारिश की नमी उसके चेहरे पर नहीं, उस पर पड़ी हुई थी-उसके बालों में पानी की हल्की चमक, जैकेट के किनारे से टपकता एक-एक बूंद, और आँखों में वही असमंजस जो उसने कई बार दूर से महसूस किया था। आदित्य। नाम उसके दिमाग में ऐसे आया जैसे किसी ने धीरे से पुकारा हो। वो काउंटर के पास रुकी, लेकिन कदम अपने-आप पीछे खींच गए। मन में एक इच्छा थी-बस एक बार साफ़ बात हो जाए। जो अधूरा रह गया है, उसे पूरा करने के लिए सही समय और सही शब्द मिल जाएँ।


आदित्य ने उसे देखते ही मुस्कुराने की कोशिश की, फिर जैसे उसे अपनी मुस्कान खुद ही भारी लग गई हो, उसने हल्का-सा सिर झुका लिया। “नीलम?” उसकी आवाज़ में बारिश की तरह नरमी थी, लेकिन अंत में ठहराव-जैसे पूछना चाहता हो और पूछने का हक भी न हो।


“हाँ।” नीलम ने चाय की चुस्की नहीं ली। कप अभी भी हाथ में था, और उँगलियों में हल्की कंपकंपी। “आप… यहाँ?”


“मैंने सोचा था-आप आएँगी।” आदित्य ने कुर्सी की तरफ इशारा किया, पर बैठने से पहले उसने एक पल रुककर जैसे दूरी नापी हो। “क्योंकि आपने पहले… लाइब्रेरी में जो किताब लौटाई थी-उसके अंदर वाला पर्चा मुझे मिला।”


नीलम के भीतर कुछ चटक-सा गया। वो पर्चा। उसने सोचा था, शायद किसी और को मिल जाएगा। उसके कागज़ पर उसकी लिखावट थी-एक लाइन, अधूरी, बस यूँ ही: “कभी मिले तो बताना।” उसे याद आते ही गालों की गर्मी गर्दन तक फैल गई।


“वो… आपने पढ़ा?” नीलम ने पूछा, और उसकी आवाज़ में खुद से ज़्यादा सवाल थे।


आदित्य ने पर्चे का ज़िक्र करते हुए हाथ नहीं उठाया; बस अपनी जेब की तरफ देखा, फिर खाली हाथ दिखाकर बोला, “नहीं। मैंने बस देखा। और फिर… मुझे लगा, आपने जानबूझकर छोड़ा है। इसलिए आज आया।”


नीलम ने पहली बार ध्यान दिया कि आदित्य के कपड़े ठीक-ठाक हैं, पर उनकी सिलाई में भीगने का असर है-वो बारिश में समय लेकर आया था, भागकर नहीं। उस एहसास ने उसे नरम कर दिया, फिर तुरंत ही एक और डर उठ गया-अगर उसने सच में जानबूझकर छोड़ा था, तो सामने वाले के मन में उसकी जगह क्या थी? दोस्ती? या कुछ और?


“आपको लगा…?” नीलम ने वाक्य अधूरा छोड़ दिया। उसकी उँगलियाँ कप के किनारे पर घूमती रहीं।


आदित्य ने खिड़की की तरफ देखा, बाहर सड़क पर टपकती रोशनी लकीरों की तरह गिर रही थी। फिर वापस उसकी ओर। “मुझे लगा, आप भी… मेरी तरह कुछ कहना चाहती हैं। पर कह नहीं पातीं।”


ये शब्द उसके भीतर की अधूरी खामोशी पर सीधे टिक गए। नीलम को लगा, जैसे किसी ने उसकी छाती से पर्दा हटाकर रोशनी कर दी हो-और फिर उसी पल अंधेरा भी। उसने अपनी हथेली कप के नीचे छिपा ली। “मैं… कह नहीं पाती, ये आपने कैसे समझा?”


आदित्य की आँखों में एक हल्का-सा संकोच आया। “क्योंकि हर बार जब मैं दिखता हूँ, आप मुस्कुरा देती हैं… लेकिन आपकी मुस्कान के पीछे आप खुद को रोकती हैं। जैसे… डर है कि अगर थोड़ी देर बात हुई, तो सब बदल जाएगा।”


नीलम का गला सूख गया। बारिश की आवाज़ अब भी थी, पर उसके कानों में आदित्य की बात ज़्यादा साफ़ थी। उसने चाहा कि वो उसे रोक दे-कि ये सब बातें अभी नहीं, अभी नहीं। लेकिन शब्द नहीं निकले। उसके भीतर एक इच्छा थी-किसी एक पल में सब सच कह देने की। और उसी इच्छा ने उसे धोखा भी दिया, क्योंकि सच बोलने से पहले भरोसा चाहिए था।


कैफे के अंदर एक और ग्राहक की हँसी टकराकर दीवारों से लौट रही थी। चाय की भाप हवा में फैल रही थी। नीलम ने कप आखिरकार होंठों से लगाकर पी लिया, जैसे खुद को संभालने की आख़िरी कोशिश हो। “आप… मेरे बारे में इतनी बातें जानते हैं?”


आदित्य ने हल्की साँस ली। “मैं जानता नहीं। बस महसूस करता हूँ। और… शायद गलत भी हूँ।”


“गलत?” नीलम ने शब्द दोहराया। उसके मन में उस “शायद” की गूंज बढ़ गई। उसने सोचा, अगर वो गलत हो, तो उसका ये खिंचाव भी एक भ्रम होगा। और अगर भ्रम है, तो चोट भी उतनी ही होगी-पर चोट का नाम अलग होगा।


आदित्य ने कुर्सी पर बैठते हुए अपने घुटनों को थोड़ा-सा अंदर कर लिया, जैसे बैठने से पहले भी उसे जगह कम लग रही हो। “एक बात है, नीलम… जिसे मैं आज बताना चाहता हूँ। पर डर रहा हूँ कि आप… मुझे उसी तरह देखना बंद न कर दें।”


ये बाहरी डर नहीं था-यह आदित्य का अपना भीतर का डर था। और उसी डर ने नीलम को समझाया कि उसके सामने कोई खेल नहीं, कोई प्रदर्शन नहीं-बस एक इंसान है, जो अपनी बात कहने से पहले खुद को भी बचा रहा है।


“कहिए,” नीलम ने कहा। शब्द छोटे थे, पर उनमें एक अनदेखी जिद थी। वो चाहती थी कि अधूरी खामोशी की जगह कोई ठोस आवाज़ आए।


आदित्य ने अपनी उँगली से मेज़ की सतह पर एक छोटा-सा गोला बनाया, फिर रोक दिया। “मेरे घर में… मेरी शादी की बात चल रही है। जल्द। परिवार ने तय किया है, और मैं… मैं टाल नहीं पा रहा।”

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About this book

"Kya Hai Adhura Ishq" is a romance book by Anonymous with 5 chapters and approximately 10,768 words. Adhure ishq aur uske ehsaas par romance.

This book was created using Inkfluence AI, an AI-powered book generation platform that helps authors write, design, and publish complete books. It was made with the AI Romance Novel Writer.

Frequently Asked Questions

What is "Kya Hai Adhura Ishq" about?

Adhure ishq aur uske ehsaas par romance

How many chapters are in "Kya Hai Adhura Ishq"?

The book contains 5 chapters and approximately 10,768 words. Topics covered include पहली मुलाकात, अधूरी खामोशी, मुस्कान के पीछे छुपी हिचक, उसके बिना अधूरा दिन, गलतफहमी और रिश्ते की परीक्षा, and more.

Who wrote "Kya Hai Adhura Ishq"?

This book was written by Anonymous and created using Inkfluence AI, an AI book generation platform that helps authors write, design, and publish books.

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